बाबा की पोटली या पोटली बाबा की... जो भी कह लो...

Friday, July 17, 2015

रवि की डायरी के कुछ पन्ने



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पोटली बाबा की

हम सभी का जीवन एक पोटली है...असल ये पूरी दुनियां, ये पूरी सृष्टी ही पोटली है बाबा की...जो कुछ भी मिला है...वो इसी पोटली से...जो कुछ भी जान समझ पायें हैं...वो इसी पोटली के ज़रिये...इसीलिए ये नाम ताकि हमेशा ये बात याद रहे कि मैंने जो लिखा या मुझसे जो लिखा गया वो इस पोटली का ही दिया हुआ है...मेरी तो बस अभिव्यक्ति है...साहिर का एक शेर इस बात को बहुत ही सुन्दर तरीके से रखता है...


दुनियां ने तजुरबातो-हवादीस की शक्ल में
जो कुछ मुझे दिया है वो लौटा रहा हूँ मैं

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शिव मंगल सिंह सुमन जी की एक कविता "चलना हमारा काम है" की कुछ लाइनें हैं जो कि मुझे लगता है हममे से हर किसी का परिचय हो सकती हैं.

कुछ कह लिया, कुछ सुन लिया, कुछ बोझ अपना बंट गया
अच्छा हुआ तुम मिल गए, कुछ रास्ता ही कट गया
क्या राह में परिचय कहूं, राही हमारा नाम है
चलना हमारा काम है...
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